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Narayan Choudhary's Blog

हर एक बात पे कहते हो तुम के तू क्या है ?

1.      हर एक बात पे कहते हो तुम के  तू क्या है ?
तुम्हीं कहो के ये अंदाज़-ए-गुफ्तगू क्या है  ?

[ गुफ्तगू = conversation]

2.      ना शोले में ये करिश्मा ना बर्क़ में ये अदा
कोई  बताओ  कि वो शोखः-ए-तुंद-ख़ू  क्या  है ?

[ बर्क़ = lightening; तुंद = sharp/angry; ख़ू = behaviour]

3.      यह रश्क  है कि वो होता है हम-सुख़न तुमसे
वागरना   ख़ौफ-ए-बद-आमोज़ी-ए-अदू   क्या  है ?

[ रश्क = jealousy; हम-सुख़न = to speak together/to agree;
ख़ौफ = fear; बद = bad/wicked; आमोज़ी = education/teaching;
अदू = enemy ]

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वो फिराक़ और वो विसाल कहां ?

1.      वो  फिराक़ और  वो विसाल  कहां ?
वो शब-ओ-रोज़-ओ-माह-ओ-साल कहां ?

[ फिराक़ = separation; विसाल = meeting; शब = night; रोज़ = day; माह = month; साल = year ]
2.      फ़ुर्सत-ए-कारोबार-ए-शौक़  किसे ?
ज़ौक़-ए-नज़्ज़ा-ए-जमाल  कहां ?


[ ज़ौक़ = delight/joy; जमाल = beauty]

3.      दिल तो दिल वो  दिमाग़  भी ना रहा
शोर-ए-सौदा-ए-ख़त्त-ओ-ख़ाल   कहां ?


4.      थी वो इक शख़्स के तसव्वुर से
अब वो  रानाई-ए-ख़याल  कहां ?

 

ये ना थी हमारी क़िस्मत


1.      ये ना थी हमारी क़िस्मत के विसाल-ए-यार होता
अगर  और  जीते  रहते   यही   इंतेज़ार  होता

[ विसाल-ए-यार = meeting with lover]

2.      तेरे  वादे पर जिए हम  तो ये जान झूट जाना
के  ख़ुशी से  मर ना जाते  अगर एतबार होता

[ एतबार = trust/confidence]

   

क़ासिद के आते-आते ख़त इक और लिख रखूं

1.      मिलती है  ख़ू-ए-यार से  नार  इल्तिहाब में
काफ़िर हूं गर ना मिलती हो राहत अज़ाब में

[ ख़ू-ए-यार = lover's nature/behaviour/habit; नार = fire; इल्तिहाब = flame; अज़ाब = sorrow ]

2.      कब  से हूं, क्या बताऊं जहाँ-ए-ख़राब में ?
शब  हाए हिज्र को भी रखूं गर हिसाब में

[ जहाँ-ए-ख़राब = world of problems; शब = night,
हिज्र = separation ]

 

न था कुछ तो ख़ुदा था, कुछ ना होता तो ख़ुदा होता

1.      न था कुछ तो ख़ुदा था, कुछ ना होता तो ख़ुदा होता
डुबोया  मुझको  होने  ने,  ना  होता  मैं  तो  क्या  होता ?

2.      हुआ जब ग़म से यूं बेहिस तो ग़म क्या सर के कटने का
ना  होता  गर जुड़ा  तन  से तो  ज़ानूं पर धड़ा होता

[ बेहिस = shocked/stunned; ज़ानूं = knee ]

3.      हुई मुद्दत के  'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है
वो हर इक बात पे कहना, के यूं होता  तो क्या होता ?

[ मुद्दत = duration/period]

   

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