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Narayan Choudhary's Blog

ये ना थी हमारी क़िस्मत


1.      ये ना थी हमारी क़िस्मत के विसाल-ए-यार होता
अगर  और  जीते  रहते   यही   इंतेज़ार  होता

[ विसाल-ए-यार = meeting with lover]

2.      तेरे  वादे पर जिए हम  तो ये जान झूट जाना
के  ख़ुशी से  मर ना जाते  अगर एतबार होता

[ एतबार = trust/confidence]

 

क़ासिद के आते-आते ख़त इक और लिख रखूं

1.      मिलती है  ख़ू-ए-यार से  नार  इल्तिहाब में
काफ़िर हूं गर ना मिलती हो राहत अज़ाब में

[ ख़ू-ए-यार = lover's nature/behaviour/habit; नार = fire; इल्तिहाब = flame; अज़ाब = sorrow ]

2.      कब  से हूं, क्या बताऊं जहाँ-ए-ख़राब में ?
शब  हाए हिज्र को भी रखूं गर हिसाब में

[ जहाँ-ए-ख़राब = world of problems; शब = night,
हिज्र = separation ]

 

न था कुछ तो ख़ुदा था, कुछ ना होता तो ख़ुदा होता

1.      न था कुछ तो ख़ुदा था, कुछ ना होता तो ख़ुदा होता
डुबोया  मुझको  होने  ने,  ना  होता  मैं  तो  क्या  होता ?

2.      हुआ जब ग़म से यूं बेहिस तो ग़म क्या सर के कटने का
ना  होता  गर जुड़ा  तन  से तो  ज़ानूं पर धड़ा होता

[ बेहिस = shocked/stunned; ज़ानूं = knee ]

3.      हुई मुद्दत के  'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है
वो हर इक बात पे कहना, के यूं होता  तो क्या होता ?

[ मुद्दत = duration/period]

   

इश्क़ ने 'ग़ालिब' निकम्मा कर दिया

1.      ग़ैर लें  महफ़िल  में  बोसे जाम के
हम रहें यूं तिस्ना-लब पैग़ाम के

[ बोसा = kiss, तिस्ना = thirsty ]

2.      ख़स्तगी  का  तुमसे क्या  शिकवा की ये
हथकण्डे हैं चर्ख़-ए-नीली-फाम के

[ ख़स्तगी = injury; शिकवा = comlaint; हथकण्डे = tactics; चर्ख़ = sky; नीली-फाम = blue colour/complexion]

3.      ख़त लिखेंगे गरचे मतलब कुछ ना हो
हम  तो  आशिक़  हैं  तुम्हारे  नाम के

 

उनके देखे से जो आ जाती है मुँह पर रौनक़

 

उनके देखे से जो आ जाती है मुँह पर रौनक़
वो समझते हैं कि बीमार का हाल अच्छा है


देखिए पाते हैं उश्शाक़ बुतों से क्या फ़ैज़
इक ब्राह्मण ने कहा है कि ये साल अच्छा है

हमको मालूम है जन्नत की हक़ीकत लेकिन
दिल को खुश रखने को ग़ालिब ये ख़याल अच्छा है

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