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हर एक बात पे कहते हो तुम के तू क्या है ?
1. हर एक बात पे कहते हो तुम के तू क्या है ?
तुम्हीं कहो के ये अंदाज़-ए-गुफ्तगू क्या है ?
[ गुफ्तगू = conversation]
2. ना शोले में ये करिश्मा ना बर्क़ में ये अदा
कोई बताओ कि वो शोखः-ए-तुंद-ख़ू क्या है ?
[ बर्क़ = lightening; तुंद = sharp/angry; ख़ू = behaviour]
3. यह रश्क है कि वो होता है हम-सुख़न तुमसे
वागरना ख़ौफ-ए-बद-आमोज़ी-ए-अदू क्या है ?
[ रश्क = jealousy; हम-सुख़न = to speak together/to agree;
ख़ौफ = fear; बद = bad/wicked; आमोज़ी = education/teaching;
अदू = enemy ]
ये ना थी हमारी क़िस्मत
1. ये ना थी हमारी क़िस्मत के विसाल-ए-यार होता
अगर और जीते रहते यही इंतेज़ार होता
[ विसाल-ए-यार = meeting with lover]
2. तेरे वादे पर जिए हम तो ये जान झूट जाना
के ख़ुशी से मर ना जाते अगर एतबार होता
[ एतबार = trust/confidence]
क़ासिद के आते-आते ख़त इक और लिख रखूं
1. मिलती है ख़ू-ए-यार से नार इल्तिहाब में
काफ़िर हूं गर ना मिलती हो राहत अज़ाब में
[ ख़ू-ए-यार = lover's nature/behaviour/habit; नार = fire; इल्तिहाब = flame; अज़ाब = sorrow ]
2. कब से हूं, क्या बताऊं जहाँ-ए-ख़राब में ?
शब हाए हिज्र को भी रखूं गर हिसाब में
[ जहाँ-ए-ख़राब = world of problems; शब = night,
हिज्र = separation ]
न था कुछ तो ख़ुदा था, कुछ ना होता तो ख़ुदा होता
1. न था कुछ तो ख़ुदा था, कुछ ना होता तो ख़ुदा होता
डुबोया मुझको होने ने, ना होता मैं तो क्या होता ?
2. हुआ जब ग़म से यूं बेहिस तो ग़म क्या सर के कटने का
ना होता गर जुड़ा तन से तो ज़ानूं पर धड़ा होता
[ बेहिस = shocked/stunned; ज़ानूं = knee ]
3. हुई मुद्दत के 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है
वो हर इक बात पे कहना, के यूं होता तो क्या होता ?
[ मुद्दत = duration/period]
इश्क़ ने 'ग़ालिब' निकम्मा कर दिया
1. ग़ैर लें महफ़िल में बोसे जाम के
हम रहें यूं तिस्ना-लब पैग़ाम के
[ बोसा = kiss, तिस्ना = thirsty ]
2. ख़स्तगी का तुमसे क्या शिकवा की ये
हथकण्डे हैं चर्ख़-ए-नीली-फाम के
[ ख़स्तगी = injury; शिकवा = comlaint; हथकण्डे = tactics; चर्ख़ = sky; नीली-फाम = blue colour/complexion]
3. ख़त लिखेंगे गरचे मतलब कुछ ना हो
हम तो आशिक़ हैं तुम्हारे नाम के
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